स्वप्न आने के कारण

स्वप्न आते क्यों है 

स्वप्न देखना एक सामान्य प्रक्रिया है  प्रत्येक व्यक्ति देखता है अगर व्यक्ति महीने दो महीने में एक या दो स्वप्न देखता है तो उसकी सामान्य प्रवृति होती है लेकिन यही स्वप्न जब व्यक्ति रोज सोते समय एक या दो स्वप्न देखता है तो यह सामन्य प्रवृति नहीं होती है |जब कोई व्यक्ति जैसे सोता है वह कुछ न कुछ देखने लगता है और कुछ व्यक्ति बोलते और बड़बड़ाते है इन सबका का क्या रहस्य है  इन सपनो का सोते समय आने का प्रमुख कारण  क्या है|


सोते समय सपनो के आने का सबसे  मुख्य कारण  जब व्यक्ति के चेतन स्तर पर जो घटनाये साकार नहीं हो पाती है वे अचेतन स्तर  या सुप्तावस्था में एक रूप लेकर का उपस्थित होती है फ्रायड का कहना है की स्वप्न इच्छा पूर्ति के साधन है जो इच्छाएं हमारी अधूरी रह जाती है इसका कारण  कुछ भी हो सकता है जैसे सामाजिक ऊंच नीच की भावना ,आर्थिक तंगी  लेकिन ये सब इच्छाएं मरी नहीं है भविष्य में कभी भी इन इच्छाओ की पूर्ति स्वप्न के माध्यम से हो सकती है एक भूखा गरीब व्यक्ति स्वप्न में राजा बनकर अच्छा भोजन करता है इस प्रकार स्वप्नों का देखना हमारी इच्छाओ से जुड़ा हुआ होता है | ऐसे बहुत लोग है जिनकी इच्छाओ तो बहुत होती है लेकिन किसी भी कारण वस् उनकी इच्छाएं पूरी नहीं हो पाती  है और वो किसी तरह उसे पूरा करने चाहते है वे इसी प्रकार के स्वप्न देखते है लेकिन इच्छाएं तो सब कुछ न कुछ रखते है लेकिन सबके स्वप्न इस तरह के नहीं होते है | 
कुछ सपने तो ऐसे होते है जिनसे व्यक्ति डरता ,कम्पन  पसीने से डूब  जाता  है ऐसा स्वप्न वही लोग देखते है जिनके साथ तीन चार माह पूर्व ऐसी घटना घटी हो चाहे घटना जैसे भी घटी हो लेकिन उस घटना का मूल द्योतक वह  व्यक्ति खुद होता है | सपनो का विश्लेषण फ्रायड ने किया परन्तु हर स्वप्न की व्यख्या सेक्स का दमन जनित भावना के परिणाम स्वरुप होती है जो की सत्य होते हुए भी हर व्यक्ति के लिए बतया जाना उपुक्त नहीं होता पाता  क्योकि कुतर्क से मूल बात नस्ट हो जाती है मुख्या बात यह है की सेक्स की कुंठा से सेक्स जनित स्वप्न आते है जिनका किशोरावस्था से आगे तक जाना स्वाभाविक होता है |

ऐसे सपने जो सच होते है 

कई सपने ऐसे भी होते है जो निकर भविष्य की सूचना देते है जैसे नौकरी का लगाना ,घर में नए मेहमान का आना आदि परमानोविज्ञानियो के अनुसार ऐसे लोग जो परोपकारी ,आत्मकेंद्रित दुसरो को न सताने वाले होते है वो ऐसे सपने देखते है | अच्छी आत्मा वाले लोग इस तरह के स्वप्न देखते है और मनोविज्ञान कहता है की जो व्यक्ति अन्तः दर्शन के पोषक है सिद्धहस्त है उन्हें रात में ही स्वप्न के माध्यम से अहसास हो जाता है  | 

स्वप्न के प्रतीक 

मनोविज्ञानी स्वप्नों में देखे गए प्रतीकों पर दृस्टि जमाते है उनकी व्यख्या करते है जैसे आसमान में उड़ाना मतलब उन्नत करना होता है सीढ़ी  से गिरना असफलता की निसानी है परामनोविज्ञान में भी चन्द्रमा,फल ,बल्व का फ्यूज होना  खुद का उड़ाना आदि की अलग अलग व्याख्या की गई है  कुछ  यह मान्यता रहती है की व्यक्ति दो प्रकार के होते है पहले वो जो अधिक स्वप्न देखते है जगाने पर अधिकतर सपने याद् नहीं रहते हैये सपने इच्छाओ से ताल्लुक रखते है दूसरे व्यक्ति बहुत काम स्वप्न देखते है योग से आत्मा स्थिर होती है ध्यान रखने वाले जो व्यक्ति त्रिकुटी पर केंद्रित होते है उनकी आत्मा धीरे धीरे केंद्रित होने लगती हैऔर सपने सच होना शुरू हो जाते है|    

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